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निधि तू किसकी निधि है
जानू मैं किसकी तू विधि है
हम माने तो माने कैसे
जिसकी तू प्रीति है
माँ की ममता प्यारी है
निधि जिसकी तू विधि है..
प्रेम प्यार मुझ से भी रखना
माँ की ममता वह न्यारी है
क्या मैं तेरा हूँ या है तू मेरी
फिर भी बंधन माँ का प्यारा सा
जहां तू है नन्ही सी मेरी भी
इस पथ से मिले तो क्या हुआ
आकर्षण तो ममता का है
पवित्र प्रेम को समझो प्रिय
माँ से पूछो रिश्ता क्या है
मर्म को मानो तो बतला देना
मुझ से तेरा रिश्ता क्या है
ना जानो तो ख़त लिखना
कि पवित्रता का रिश्ता क्या
जिसके दम पर है हम भी
फिर वस्त्र रिश्ते के कुछ भी हो
पहनेगें उन्हें पवित्र प्रेम से
जानेगा यह जग भी सारा
इन रिश्तों की इस धारा से
जी उठे रिश्तों की कड़ियाँ
और बोल उठे माँ की ममता
देना मुझे फिर इन अपनों को
क्या सांझ और क्या सवेरा
प्रभु है यह सब कुछ तेरा ही तेरा
*
*
अब बोल क्या बोले
तू मेरे इन रिश्तों को
सपना समझे तेरी मर्जी
मैंने तो संजोया अपनों को
अब तू जाने तू क्या कहती अपनों को
मेरा तो कहना पूर्ण हुआ
अब कहना है तुमको अपनों को
.
इन्तजार है एक स्नेही का
इस स्नेही को स्नेह के लिए
*
अज्ञात स्नेही - यशवंत
निधि तू किसकी निधि है
जानू मैं किसकी तू विधि है
हम माने तो माने कैसे
जिसकी तू प्रीति है
माँ की ममता प्यारी है
निधि जिसकी तू विधि है..
प्रेम प्यार मुझ से भी रखना
माँ की ममता वह न्यारी है
क्या मैं तेरा हूँ या है तू मेरी
फिर भी बंधन माँ का प्यारा सा
जहां तू है नन्ही सी मेरी भी
इस पथ से मिले तो क्या हुआ
आकर्षण तो ममता का है
पवित्र प्रेम को समझो प्रिय
माँ से पूछो रिश्ता क्या है
मर्म को मानो तो बतला देना
मुझ से तेरा रिश्ता क्या है
ना जानो तो ख़त लिखना
कि पवित्रता का रिश्ता क्या
जिसके दम पर है हम भी
फिर वस्त्र रिश्ते के कुछ भी हो
पहनेगें उन्हें पवित्र प्रेम से
जानेगा यह जग भी सारा
इन रिश्तों की इस धारा से
जी उठे रिश्तों की कड़ियाँ
और बोल उठे माँ की ममता
देना मुझे फिर इन अपनों को
क्या सांझ और क्या सवेरा
प्रभु है यह सब कुछ तेरा ही तेरा
*
*
अब बोल क्या बोले
तू मेरे इन रिश्तों को
सपना समझे तेरी मर्जी
मैंने तो संजोया अपनों को
अब तू जाने तू क्या कहती अपनों को
मेरा तो कहना पूर्ण हुआ
अब कहना है तुमको अपनों को
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इन्तजार है एक स्नेही का
इस स्नेही को स्नेह के लिए
*
अज्ञात स्नेही - यशवंत
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