का
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मैंने कुछ इस प्रकार से व्यक्त किया है__
तो क्या छोड़ दे उसको
जिसका हमें भरोसा है
धोका तो धोका ही है
इससे हमें क्या
हमें तो भरोसा है
दूसरों से हमें क्या
कुछ उसके बिना चलता नहीं
तो जगत सारा धोका है
धोका है तो है__फिर भी हमें भरोसा है
चलेगें यों ही हम
जिस पर है भरोसा
हो तो हो धोका
मौत भी तो आती है
क्या नहीं वह धोका ?
इससे बड़ा होगा क्या
धोके पे धोका
इन्शान की कमजोरी
होता है ये धोका
चलता चल प्यारे
है साथ भरोसा..
मालिक ने बनाया
वह नहीं है धोका
प्रीत के सहारे
पार कर ये प्यारे
संसार गंगा जल है
जिसने तुझे जगाया
ये सभी है अपने
कोई नहीं हमारा
बस एक ही है न्यारा
वही सब कुछ हमारा
प्रिय ज्योत जगाता चल
ये है सब कुछ हमारा
प्रेम प्रवाह बहाता चल
यही जीवन की धारा
कौन जाने कितने प्रियजन
मिलेगें प्यार की मस्ती में
ज्ञान ज्योति को चलने में देखो
फिर पतंगा क्यों जले
प्रेम कि खातिर जो मरे
जिए तो जाने
दूर ना भागो इस जीवन से
करके देखो हमसे प्यार
इस प्यार के वे रंग होते
होते जिनसे कई अवतार
रंग रूप खुशबु है एक बहाना
दिल से दिल को छूकर देखा
प्रेम उन्होंने जाना
राम ने सबरी में देखा
सबरी ने जाना राम को
प्रेम तत्व को जाना उसने
किया जिसने सचा प्रेम
रिश्तों के शब्द नाम बिना
रचा दिया यह सब संसार
अब तो समझो उसको
समझ गए तो पार हो
प्रेम प्रीत की नोका ना छोडो
प्रिय यही उसकी ज्योत ज्वाला है..
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आपका स्नेही - यशवंत
इससे हमें क्या
हमें तो भरोसा है
दूसरों से हमें क्या
कुछ उसके बिना चलता नहीं
तो जगत सारा धोका है
धोका है तो है__फिर भी हमें भरोसा है
चलेगें यों ही हम
जिस पर है भरोसा
हो तो हो धोका
मौत भी तो आती है
क्या नहीं वह धोका ?
इससे बड़ा होगा क्या
धोके पे धोका
इन्शान की कमजोरी
होता है ये धोका
चलता चल प्यारे
है साथ भरोसा..
मालिक ने बनाया
वह नहीं है धोका
प्रीत के सहारे
पार कर ये प्यारे
संसार गंगा जल है
जिसने तुझे जगाया
ये सभी है अपने
कोई नहीं हमारा
बस एक ही है न्यारा
वही सब कुछ हमारा
प्रिय ज्योत जगाता चल
ये है सब कुछ हमारा
प्रेम प्रवाह बहाता चल
यही जीवन की धारा
कौन जाने कितने प्रियजन
मिलेगें प्यार की मस्ती में
ज्ञान ज्योति को चलने में देखो
फिर पतंगा क्यों जले
प्रेम कि खातिर जो मरे
जिए तो जाने
दूर ना भागो इस जीवन से
करके देखो हमसे प्यार
इस प्यार के वे रंग होते
होते जिनसे कई अवतार
रंग रूप खुशबु है एक बहाना
दिल से दिल को छूकर देखा
प्रेम उन्होंने जाना
राम ने सबरी में देखा
सबरी ने जाना राम को
प्रेम तत्व को जाना उसने
किया जिसने सचा प्रेम
रिश्तों के शब्द नाम बिना
रचा दिया यह सब संसार
अब तो समझो उसको
समझ गए तो पार हो
प्रेम प्रीत की नोका ना छोडो
प्रिय यही उसकी ज्योत ज्वाला है..
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आपका स्नेही - यशवंत
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